शनिवार, 25 मई 2013

To LoVe 2015: IPL ने क्रिकेट को " कोठा " बनाया !


क्या कहूं, एक हफ्ते से देश की सारी समस्याएं पीछे छूट गई हैं, हर तरफ सिर्फ एक ही चर्चा है, वो है क्रिकेट की। अच्छा क्रिकेट की भी चर्चा हो तो एक बार ठीक है, लेकिन यहां चर्चा हो रही है आईपीएल 6 की, वैसे इसकी चर्चा में भी कोई बुराई नहीं है। पर अब इस चर्चा में खेल कहीं शामिल ही नहीं है। आईपीएल का आँरेंज और पर्पल कैप किसके पास है और अभी इस कैप के लिए किसकी चुनौती कारगर हो सकती है, इससे किसी को कोई लेना देना नहीं है। आपको पता होगा कि कम से कम 16-16 मैच तो सभी टीमों ने खेले ही हैं, इस दौरान खिलाड़ियों ने बहुत सी अच्छी बाल फैंकी है और बहुत शानदार शाट्स भी लगाए हैं। लेकिन किसी को इससे कुछ लेना-देना नहीं है। जानते हैं आज चर्चा क्या हो रही है ? चर्चा हो रही है क्रिकेट में सट्टेबाजी की, चर्चा हो रही है क्रिकेट में लड़कियों के इस्तेमाल की, चर्चा हो रही है मैंच के बाद रात में होने वाली रंगीन पार्टियों की, चर्चा हो रही है नो बाल फेंकने लिए कालगर्ल के इस्तेमाल की,  चर्चा हो रही है क्रिकेट में अंडरवर्ल्ड के कनेक्शन की। हालत ये है कि क्रिकेट की खबरें जो न्यूज चैनलों पर "खेल के बुलेटिन" में हुआ करती थीं, आज ये खबरें चैनलों के " क्राइम शो " में चल रही हैं। इस खेल में आज जितनी बात खेल और खिलाड़ियों की नहीं हो रही है, उससे कहीं ज्यादा बातें चीयर गर्ल, कालगर्ल, मांडल्स, अभिनेत्रियों और रात में होने वाली रंगीन पार्टियों में पांच से दस ग्राम कपड़े पहन कर खिलाडियों के इर्द-गिर्द मंडराने वाली लड़कियों की हो रही है। आसान शब्दों में कहूं तो सच्चाई ये है कि इस आईपीएल ने क्रिकेट को कोठा बना दिया है।

देखिए आपको अगर इस खेल में होने वाले "असली खेल" को समझना है तो थोड़ा सावधानी और धैर्य से इस पूरे लेख को आराम से पढ़ना होगा। वजह इसमें किरदार बहुत सारे हैं। कुछ किरदार ऐसे हैं, जिनके बारे में चर्चा करना जरूरी है। बगैर कोई भूमिका के सबसे पहले मैं   बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन की बात करता हूं। अध्यक्ष के साथ ही ये चेन्नई सुपर किंग के मालिक भी हैं। इन पर बहुत ही गंभीर आरोप हैं, लेकिन बीसीसीआई इतनी पावरफुल बाँडी है कि इनका कोई कुछ नहीं कर सकता। इनके दामाद टीम के सीईओ की हैसियत रखते थे। मुंबई पुलिस की जांच में पाया गया है कि ये खुद ही सट्टेबाजी भी करते थे और अपनी ही टीम की रणनीति अभिनेता बिंदू दारा सिंह के जरिए सट्टेबाजों से साझा करते थे। अब गिरफ्तार हो चुके हैं। दामाद गुरुनाथ मयप्पन के गिरफ्तार हो जाने के बाद नैतिकता के आधार पर श्रीनिवासन को अध्यक्ष पद से हट जाना चाहिए था, लेकिन वो अड़े हैं कि इस्तीफा नहीं दूंगा। आईपीएल में एक नियम है कि अगर कोई फ्रैंचाइजी अनैतिक कार्य में शामिल पाया जाता है तो उसकी टीम को ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाएगा। अब जिस टीम का सीईओ सट्टेबाजी कर रहा है, उस टीम को क्यों नहीं अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए ? अब तक तो इस टीम को अयोग्य घोषित कर आईपीएल से बाहर कर दिया जाना चाहिए था।

मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि आखिर श्रीनिवासन की चमड़ी कितनी मोटी है। कुछ दिन पहले जब राजस्थान रायल्स के तीन खिलाड़ी श्रीसंत के साथ दो अन्य पकड़े गए, तब इसी बीसीसीआई ने फ्रैंचाइजी के मालिकों पर दबाव बनाया गया को वो खुद उनके खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराएं। राजस्थान रायल्स ने मजबूर होकर रिपोर्ट दर्ज कराया और उन खिलाड़ियों से करार भी तोड़ दिया। मेरा सवाल है श्रीनिवासन साहब आपने अपने दामाद के खिलाफ पुलिस में अभी तक रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज कराया ? आप फंस ना जाएं इसलिए अपने सट्टेबाज दामाद को अब ये बता रहे हैं कि वो तो सिर्फ टीम में एक मानद सदस्य है। उसका टीम प्रबंधन से कोई लेना देना नहीं है, वैसे एक बात तो आपने सही कहा कि उसका टीम से कोई लेना देना तो नहीं था, उसका लेना देना आईपीएल की आड़ में कालगर्ल और माडल्स को रिसार्ट में बुलाना था, सट्टेबाजी कराना था, दलाली का काम था। एक नजर में ये दामाद वाकई कितना घिनौना दिखाई दे रहा है।

वैसे तो ये उनके घर की बात है, इसका जिक्र नहीं होना चाहिए, लेकिन जब श्रीनिवासन का बेटा अश्विन खुलेआम अपने पिता पर गंभीर आरोप लगा रहा है तो दो लाइन की चर्चा मै भी कर लेता हूं। कहा जा रहा है बीसीसीआई अध्यक्ष अपने बेटे से इसलिए नाराज हैं, क्योंकि कि वो समलैंगिक है। यानि मर्दों के साथ सोता है। बेटे का आरोप है कि इससे नाराज उसके पिता ने उसे अपने गुर्गों से पिटवाया भी। लेकिन बेटा चीख-चीख कर कह रहा है कि यह उसका निजी मामला है, इस पर उसके पिता नाराज क्यों हैं? हालांकि अब श्रीनिवासन इसका क्या जवाब देगें। वैसे मुझे लगता है कि बाप जो कुछ जमा करता है वो अपने बेटों के लिए ही तो करता है। अब आईपीएल से इतनी चीयर गर्ल, कालगर्ल, माडल्स, अभिनेत्रियों के अलावा हजारों लड़कियां जुड़ी हैं और बेटा है कि वो मर्दों के साथ सो रहा है, गुस्सा आना तो स्वाभाविक है। खैर बाप, बेटे और दामाद का असली चेहरा सबके सामने है। बेहतर तो यही था कि श्रीनिवासन को खुद बीसीसीआई अध्यक्ष का पद छोड़कर अलग हो जाते। लेकिन ये इतना आसान नहीं है, अगर श्रीनिवासन और मनयप्पा जाते हैं तो उनकी टीम भी तो जाएगी। इसलिए मुझे तो लगता है कि श्रीनिवासन अंतिम दम तक कुर्सी नहीं छोड़ने वाले हैं।

अब बात क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी की। धोनी आईपीएल में ही नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान हैं और क्रिकेटप्रेमियों को उनसे बहुत प्यार है। हो भी क्यों ना ,धोनी की अगुवाई में टीम ने दो-दो वर्ल्ड कप जीते हैं। लेकिन सट्टेबाजी में उनकी ही टीम के तथाकथित सीईओ दामाद मनयपत्ता का नाम सामने आया है, जो धोनी के बहुत अच्छे मित्र हैं। कई दफा प्लेइंग 11 तय करने में या फिर टीम की रणनीति बनाने के दौरान भी ये दामाद मौजूद रहता है। ऐसे में आसानी समझा जा सकता है कि जो आदमी सट्टेबाजी में पैसा लगा रहा है तो वो पैसा डुबोने के लिए नहीं, बल्कि कमाने के लिए लगा रहा है। ऐसे में इस बात से कत्तई इनकार नहीं किया जा सकता कि वो टीम के भीतर की रणनीति भी सट्टेबाजों के साथ शेयर ना करता हो। धोनी की बात यहीं खत्म नहीं हो रही है। उनकी पत्नी साक्षी धोनी और बिंदू दारा सिंह की करीबी पर भी सवाल उठ रहे हैं। वैसे तो स्टेडियम के वीवीआईपी स्टैंड में आमंत्रित मेहमान यहां कहीं भी बैठकर मैच देख सकता है, लेकिन सट्टेबाजी में पुलिस के हत्थे चढ़े बिन्दुदारा सिंह ने कहा है कि उन्हें अपने पास बैठने के लिए साक्षी ने खुद बुलाया था। बिंदु सट्टेबाजी कर रहा है और साक्षी धोनी की पत्नी है, जाहिर है कि उसे भी बहुत सी चीजें पता होंगी। अब साक्षी और बिंदु की मित्रता में सट्टेबाजी शामिल नहीं है, इसे भरोसे के साथ कैसे कहा जा सकता है। जाहिर हर आदमी यही कहेगा कि इसकी भी जांच होनी चाहिए। वैसे धोनी की पत्नी का नाम एक जगह और आया है। स्पाँट फिक्सिंग में गिरफ्तार श्रीसंत ने जिस लड़की को मंहगा फोन गिफ्ट किया है, वो लड़की कोई और नहीं बल्कि साक्षी की दोस्त है और उसकी श्रीसंत से मुलाकात भी साक्षी ने ही कराई थी। इसलिए इस साक्षी कनेक्शन को भी खंगालने की जरूरत है।

वैसे अब ये मामला पुलिस के हाथ में है, धीरे-धीरे सबकुछ खुलेगा ही। लेकिन मैं तो यही कहूंगा कि आईपीएल ने इस खेल की ऐसी तैसी कर दी। क्रिकेट की चर्चा अब खेल कम नंगई, टुच्चई, गाली देने, मारपीट, थप्पड़ मारने, रात रंगीली करने, मैच के पहले-मैच के बाद सेक्स, अर्धनग्न औरतों के साथ शराब पीकर चिपकने, सोने, सट्टा लगाने, मैच फिक्सिंग, गलत तरीकों से पैसा कमाने, ड्रग्स लेने, बार डांसरों से नाम जुड़ने जैसी कारगुजारियों के चलते ज्यादा चर्चा हो रही है। पुलिस की जांच में जो बात सामने आई है, उसे सुनकर हैरानी होती है, नो बाल फैंकने के लिए कैसे एक गेंदबाज लड़की की मांग कर रहा है। कह रहा है नो रिपीट, मतलब उसे आज नई चाहिए। क्या है ये ? श्रीनिवासन साहब और राजीव शुक्ला जी देश में ये कौन सा क्रिकेट आपने शुरू कर दिया है। बात पिछले सीजन की है आईपीएल की नंगई, टुच्चई की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में आईपीएल की एक टीम के विदेशी खिलाड़ी ल्यूक ने दारु पी और फिर लगे एक एनआरआई महिला से चिपकने। उससे गंदी-गंदी हरकतें करने । जबरदस्ती बेडरुम में घूस गए और अश्लील हरकतें करने की कोशिश की। लड़की के दोस्त ने रोका तो उसे इतना पीटा कि वो बेचारा आईसीयू में पहुंच गया। मारपीट में ल्यूक को भी चोटें आईं। क्रिकेटर ल्यूक की गंदी हरकत से जो क्रिकेट शर्मसार हुआ, क्रिकेट के करोडो़ फैन्स आहत हुए उसे लेकर भी बीसीसीआई अध्यक्ष बिल्कुल चुप हैं। ठीक वैसे ही जैसे अपने बेटे के मर्दों के साथ सेक्स करने यानि समलैंगिक होने पर अपने पिता से हुए विवाद को सड़कों पर लाने पर चुप है।

अच्छा इतना कुछ हो जाने के बाद भी बेशर्मी की हद ये है कि आईपीएल या बीसीसीआई का कोई भी पदाधिकारी ये मांग नहीं कर रहा है कि आईपीएल से देश में क्रिकेट का फायदा कम बल्कि राष्ट्रीय चरित्र का नुकसान ज्यादा हो रहा है। बहुत ज्यादा गंदगी बढ़ती जा रही है। खिलाड़ियों में भी चरित्रहीनता बढ़ रही है। कहा तो ये भी जा रहा है कि बकायदा फ्रैंचाइजी और आयोजक ही जहां खिलाड़ी रुकते हैं, उसी होटल में लड़कियों के कमरे भी बुक करातें हैं। मसलन ऐसा नहीं है कि "कोठेबाजी" के इस धंधे के बारे में किसी को जानकारी नहीं है, बल्कि सच ये है कि यही लोग इस तरह की सुविधाएं मुहैय्या करा रहे हैं। स्व. दारासिंह का नाम हम सब कितने सम्मान से लेते हैं, अब जांच से ये बात सामने आई है कि उन्ही का बेटा बिंदु दारा सिंह भी खिलाड़ियों, सट्टेबाजों और धंधे से जुड़े अन्य लोगों को लड़की की सप्लाई करता रहा है। वैसे अब तो वाकई देश भी जानना चाहता है कि सभी क्रिकेटरों का असली चेहरा क्या है? दो चार लोग ही यहां निकम्मे हैं, या फिर ये गंदगी पूरी टीम में फैली हुई है।

इस खेल में अगर नेताओं और पुलिस की चर्चा न की जाए तो बात पूरी ही नहीं होगी। राजनीतिक दल के नेता आम जनता से जुड़े मुद्दे पर तो एक दूसरे पर कुत्तों की तरह भोंकते दिखाई देते हैं। उनके विरोध के तरीकों से तो लगता ही नहीं कि ये कभी आपस में मिलजुल  कर शांति से बैठते भी होंगे। लेकिन ये देखकर हैरान हो जाता हूं कि क्रिकेट के मुद्दे पर सब एक दूसरे का तलवा चाटने को तैयार रहते हैं। अब देखिए ना फिक्सिंग पर कानून बनाने की बात कहकर कैसे राजीव शुक्ला और अरुण जेटली एक दूसरे के कंधे पर हाथ डाले घूम रहे हैं। दरअसल क्रिकेट में तमाम नेताओं का इंट्रेस्ट जुड़ा हुआ है। मसलन कृषिमंत्री शरद पवार, रेलमंत्री सीपी जोशी, फारुख अब्दुल्ला, अरुण जेटली, राजीव शुक्ला, अनुराग सिंह समेत तमाम राजनेता क्रिकेट में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि ये सब कभी क्रिकेट खेलते रहे हैं, इनमें क्रिकेटर तो कोई नहीं है। हां सब चक्कर बस "मोटे माल" का है।

आखिर में चर्चा पुलिस की। दरअसल आईपीएल अब इंडियन पुलिस लीग में बदल गया है। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि किसी भी इलाके में पुलिस की जानकारी के बगैर सट्टेबाजी हो ही नहीं सकती। पुलिस इन सबमें बराबर की भागीदार होती है। बल्कि जिस इलाके में सट्टेबाजी होती है, उस इलाके का थाना बहुत मंहगा होता है। यहां थानेदार की तैनाती के पैसे भी कुछ उसी हिसाब के होते हैं। मुझे तो पक्का यकीन है कि दिल्ली में बलात्कार की घटना के बाद जिस तरह से लोगों का गुस्सा पुलिस के खिलाफ था और लोग पुलिस कमिश्नर को हटाने की मांग कर रहे थे, बस जनता का ध्यान बांटने के लिए दिल्ली पुलिस ने ये तुरुप का चाल चला। सच कहूं तो दिल्ली पुलिस इस मामले में ज्यादा हाथ डालने वाली नहीं थी, उसने मुंबई से श्रीसंत को गिरफ्तार कर मीडिया का रुख मोड़ दिया था। उसका  मकसद पूरा हो गया था। आपको हैरानी होगी कि श्रीसंत को गिरफ्तार करने के बाद जब दिल्ली के पुलिस कमिश्नर मीडिया से मुखातिब थे, तो उन्होंने शातिराना अंदाज में ये बात कही भी कि आज आप लोग मेरा इस्तीफा नहीं मांग रहे हैं। मैं दिल्ली पुलिस से सवाल पूछना चाहता हूं कि अब वो किसे बचाने की कोशिश कर रही है कि अदालत को भी सही जानकारी नही दे रहे है, जिसकी वजह अदालत में उसे फटकार खानी पड़ी। ये जवाब तो दिल्ली पुलिस ही देगी।

बात मुंबई पुलिस की भी कर ली जाए। जब दिल्ली पुलिस ने श्रीसंत के साथ दो और खिलाड़ियों को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया और मुंबई पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगने दी, इस बात से मुंबई पुलिस ने आंखे तरेरनी शुरू कर दी। उसे लगा कि दिल्ली ने उसके साथ विश्वासघात किया है। बात इतनी बिगड़ गई कि दोनों ने एक दूसरे का सहयोग करना ही बंद कर दिया। श्रीसंत मुंबई में जिस होटल में रुका था, वहां छापेमारी मुंबई पुलिस ने की और वहां से बरामद लैपटाप, फोन और अन्य सामान दिल्ली पुलिस के हवाले करने से ही इनकार कर दिया। अब मुंबई ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है, जिससे लोग मुंबई पुलिस पर उंगली ना उठा सकें। लोग ये ना कहें कि दूसरे राज्य की पुलिस मुंबई में अपराधियों को गिरफ्तार कर ले रही है और मुंबई पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। अब कोई बेवकूफ ही होगा जो ये कहेगा कि मुंबई पुलिस का सट्टेबाजों से कोई लेना देना नहीं है। वैसे जब मामला एक है, आईपीएल में मैच फिक्सिंग, स्पाँट फिक्सिंग, सट्टेबाजी तो इसकी जांच अलग-अलग पुलिस को क्यों करना चाहिए ? सभी  मामले सीबीआई को सौंप दिए जाएं, वो जांच कर लेगी। लेकिन इसके लिए दिल्ली और मुंबई दोनों ही पुलिस तैयार नहीं होगी। मामला क्रिकेट में सट्टेबाजी का नहीं मामला "मोटेमाल" का भी तो है।






/a>
FuLl MoViEs
MoViEs To mOvIeS
XXX +24 <

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें