मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

To LoVe 2015:

खून बरसा है खेतों मे इस बार
सुना है खूब वोट उगेंगे इस बार
कलफ लगे खादी के सफेद कुर्ते वाले
भाई बंदी की तकरीरें करेंगे इस बार



काश लाशें बोल पातीं
वो जोर जोर चिल्लातीं
चिता मे शोर मचातीं
कब्रों से आवाज लगातीं
नेताओं.. वोट ले लो वोट
..मेरे खून से सने वोट



शब्द अम्रृत शब्द हैं विष
शब्दों से वार भी होते हैं
शब्द जीता दे शब्द हरा दे
शब्दों मे आकार भी होते हैं
 



हवा कुछ भीगी भीगी सी है
ये सीलन जाने क्या करेगी
हाँ ये दीवारें बदरंग तो हुई हैं
पुराने रंग झाँक रहे हैं इनमे से


वक्त किताब नहीं होता। इसके पन्ने भी नहीं होते। आप वापस कुछ नहीं पलट सकते। सिर्फ अहसास कर सकते हैं, बीते हुए पलों की उन खुशबुओं का, जो करीब न होते हुए भी खुद को महसूस कराती हैं, जो न होकर भी बसी होती हैं जेहन में, एक झूठ की तरह, एक फरेब की तरह, एक मृगतृष्णा सी, जो नहीं होकर भी दिखती है रेगिस्तान में पानी सी-  
/a>
FuLl MoViEs
MoViEs To mOvIeS
XXX +24 <

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें