मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

To LoVe 2015: इस फैले हुए काजल ने चुगली की है

इस फैले हुए काजल ने चुगली की है
कल रात सावन चुपके चुपके बरसा है




हम क्या कहें तुमको और तुम्हारी नाराजगियों को
तुम कैसे समझोगे मुझको और मेरी खामोशियों को



नवीन जोशी जी का उपन्यास ..दावानल.. पढ़िये, पता चल जायेगा की गंगा ,अलकनंदा और हिमालय क्यों नाराज है , इस तबाही का जिम्मेदार कौन है और इस माफिया तंत्र की जडें पहाड़ों मे कितनी गहरी धंसी हैं ..टीवी चैनल वालों के लिये इसमे काफी रेफरेंस मटीरियल है ...ये मौका है जब पुरानी गलतियों को सुधारा जा सकता है


बूँद बूँद टपकती पत्तों से बारिश की बूंदों सी
तुम चली गयीं जाने कहाँ बारिश की बूंदों सी
हर फ़िक्र और जिक्र मे हम तुमको तलाशा किये
पर तुम तो खो गयी दरिया मे बारिश की बूंदों सी
 




आज फिर तपती धूप है
जलाती हुई झुलसाती हुई
उस सच को बताती हुई कि
थोडा रुक ये गर्मी ही बादल लायेगी
सूखी धरती पर हरियाली छायेगी
वक्त का क्या है वो भी ऐसे ही बदलता है
घनघोर अन्धकार से भी सूरज जरूर निकलता है
 
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FuLl MoViEs
MoViEs To mOvIeS
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