मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

To LoVe 2015: बादलों से आज मेरी बातें हुई...

बादलों से आज मेरी बातें हुई ..उनके घर जाकर मुलाकातें हुई ..बारिशों की बूंदों से घिरी उस धुंध में ..शिकवे उनके मेरी शिकायतें हुई ..बादलों से आज मेरी बातें हुई ..छतरी जो देखी हाथ मे तो मुस्कराये वो ..मेघों के मल्हार मे इसको क्यों लाये हो..घूर के मैने कहा जानते हो आप भी ..वो तो चला गया पर आदत है आज भी..साये को उसके साथ रखता हूँ आज भी ..बूंदों से बचा कर तुम्हारी ..आगोश मे उसे रखता हूँ आज भी ..बादलों से आज मेरी बातें हुई


मेरे घर के सामने वाली पहाड़ी आज बादलों मे छुप गयी ..बारिशों की झूम ऐसी तन मन सब भिगो गयी ..याद आती है वो पुरानी छतरी जो अक्सर सूखी ही रहती थी ..सारे शहर मे बारिश होती थी फिर भी मेरी छत ना गीली होती थी ..बदले वक्त मे बारिशों ने भी रंग बदला है ..पानी शायद मेरे लिये सारा बचा के रखा है ..पर अब भीगने मे वो पहली सी खलिश नहीं होती ..बादलों तुम्हे वक्त पर बरसने की आदत क्यों नहीं होती..



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FuLl MoViEs
MoViEs To mOvIeS
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