मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

To LoVe 2015: एक दिन रिचर्ड गेर के साथ

चूंकि मेरी पढ़ाई हिन्दी मीडियम की रही थी, इसलिए शुरुआती दिनों में हॉलीवुड या दूसरी अन्य विदेशी फिल्मों के बारे में जानकारी थोड़ी कम ही थी। अलबत्ता कुछ विदेशी स्टार्स जरूर ऐसे थे जिन्हें महज मै अपनी जनरल नॉलेज बढ़ाने के नजरिए से पहचानने और याद रखने की कोशिश करता। इन्हीं में शामिल हैं अभिनेत्री जूलिया राबर्ट्स और अभिनेता रिचर्ड गेर। इन्हें मैं तब से पहचानता हूं जब मैंने दसवीं क्लास पास की थी। अब इसे इत्तेफाक कहें या मेरी किस्मत। हॉलीवुड स्टार्स के साथ मेरी पहली मुलाकात भी रिचर्ड गेर के साथ हुई। 13 अगस्त 1996 को टोरंटो में। हम इंटरनेशनल एड्स कान्फ्रेंस में गेट्स फाउंडेशन की मदद से काइज़र फाउंडेशन वालों के साथ गए थे। रिचर्ड गेर भी इसी मकसद से स्टार टीवी और गोदरेज ग्रुप के साथ हीरोज प्रोजेक्ट चला रहे थे। इसी सिलसिले में काइज़र वालों ने हमारी एक एक्सक्लूसिव मुलाकात रिचर्ड, परमेश्वरन गोदरेज और उस वक्त के स्टार टीवी के सीईओ पीटर मुखर्जी के साथ कराई। रिचर्ड बेहद जमीनी शख्स निकले। यहां यह बताना वाजिब होगा कि रिचर्ड गेर का हालीवुड में वही रुतबा रहा है जब बॉलीवुड में अमिताभ बच्चन का। दोनो तकरीबन समकालीन ही हैं। जिस वक्त अमिताभ दीवार और जंजीर के जरिए मुंबई में पांव जमा रहे थे, लगभग उसी वक्त यानी सत्तर के दशक की शुरुआत में रिचर्ड गेर फिल़्म अमेरिकन जिगेलो के जरिए लोगों के दिल पर छा रहे थे। बहरहाल हमारी मुलाकात दिलचस्प रही। उन्होंने भारत में चल रहे अपने प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी। करीब दो घंटे तक साथ रहे और इस दौरान एक बार भी यह अहसास नहीं होने दिया कि वह कितने बड़े स्टार है। मेरी लिए उनसे सीखने के लिए शायद यही सबसे बड़ृी बात थी-हमेशा जमीन पर रहना-
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