मंगलवार, 20 मई 2014

To LoVe 2015: मोदी और ढोंगी सेकूलरवादी

(मोदी की जीत के साथ ही इतना हल्ला मचा लगा कि दिमाग घूम गया...दिमाग की हालत ये हो गई कि सबकुछ गडमडगड हो गया ..ऐसी स्थिती से निकलने का एक ही तरीका होता है कि हर तस्वीर को अलग-अलग देखा जाए....)
                                                            तस्वीर -एक
एक इस्लामिक स्कॉलर ....
"मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं...उनको इस तरह धार्मिक कार्यों में हिस्सा नहीं लेना चाहिए


मगर उन्हें तब सेकूलरवाद नहीं दिखता जब--

  • "देश के उपराष्ट्रति हामिद अंसारी दिल्ली में रामलीला के दौरान राम-लक्ष्मण की आरती उतारने से मना कर देते हैं...स्कॉलर तब उन्हें देश का नुमाइंदा नहीं धर्म को मानने वाला इंसान कहता है..

  • वंदे मातरम् गान पर लोकसभा से उठकर एक मौलाना सांसद चले जाते हैं
  • जबकि वो सासंद ऐसे इलाके की नुमाइंदगी करते थे जिसमें हिंदू या दूसरे धर्म का वोटर भी था..
  • जबकि सालों पहले मौलाना आज़ाद कह चुके हैं कि वंदे मातरम् गीत गाने में कोई बुराई नहीं है..

  • इन ढोंगियों की तब आवाज़ नहीं निकलती जब कोई मौलाना वोटों को पार्टी विशेष को देने के लिए फतवा जारी करता है...
     लानत है ऐसे लोगों पर...बेहतर है ऐसे लोग चूल्लू भर पानी में डूब मरे...सेकूलरवार की अवधारणा का बेड़ा गर्क इन्हीं बेशर्म और बेहया कठमुल्लों औऱ कट्टरवादियों कर रखा है...मोदी के आने पर इन लोगो को सांप सूंघ गया है....जबकि मोदी प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार होने के पहले से ही सब वर्ग का विश्वास जीतने की बात कर रहे है...मोदी हर कामगार को सक्षम बनाने की बात कर रहे हैं...जो 21वीं सदी के भारत के लोगो की मांग है...
हकीकत है कि ज्यादातर युवाओं औऱ मध्यमवर्ग ने रोजी-रोटी के मुद्दे पर मोदी की तरफ हाथ बढ़ाया है...अपनी औऱ देश की बेहतरी की आस में मोदी का दामन थामा है...ये भी सच है कि अगर मोदी अपनी आधी भी योजनाओं को जमीन पर उतार पाएं तो देश की तस्वीर बदलते देर नहीं लगेगी...

  धर्म से उठकर विकास की बात करने वाला नेता और जनता एकजुट हो जाए..ये किसी कठमुल्ले या कट्टरवादी को कैसे वर्दाश्त होगा..उनकी दुकान का क्या होगा..ऐसे में उन्हें पूछेगा कौन? बेहतर है ऐसे ढोंगी चुप रहा करें।
                                                                                    
 (क्रमश: कल तस्वीर नंबर दो)

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FuLl MoViEs
MoViEs To mOvIeS
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